बिहार : गुरुजी ‘दक्षिणा’ में करवाते हैं पौधरोपण

आपके यहां अगर कोई विवाह समारोह हो या जन्मदिन सहित कोई अन्य समारोह मनाया जा रहा हो और ऐसे में अनजान युवाओं की टोली आकर पौधे का उपहार दे, तो आपको जरूर आश्चर्य होगा, लेकिन यह सच है। 

आज समस्तीपुर में युवाओं की एक टोली ऐसा ही कुछ कर रही है। ये युवा बिना बुलाए मेहमान की तरह किसी समारोह में शामिल हो रहे हैं और पौधा उपहारस्वरूप देकर शुभकामना दे जाते हैं। 

समस्तीपुर के ये युवा न केवल पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण जैसे नेक काम को अंजाम दे रहे हैं, बल्कि बल्कि बीएसएस क्लब के नाम से नि:शुल्क पाठशाला भी चलाते हैं और बच्चों से गुरुदक्षिणा के नाम से उनसे पौधारोपण करवाते हैं। इसमें शिक्षाग्रहण करने वाले अधिकांश बच्चे मजदूर, रिक्शाचलक या निर्धन परिवार से ताल्लुक रखते हैं। 

बिहार के समस्तीपुर के रोसड़ा प्रखंड के ढ़रहा गांव निवासी राजेश कुमार सुमन का बचपन से ही पर्यावरण के प्रति गहरी लगाव रहा है। वे बचपन से ही अपना जन्मदिन पौधरोपण कर मनाते रहे हैं। सुमन जब बड़े हुए तो उन्होंने इस अभियान से अन्य लोगों को जोड़ना शुरू किया। आज उनके इस अभियान से विभिन्न क्षेत्रों के 200 से ज्यादा युवा जुड़े हुए हैं। 

सुमन कहते हैं कि पिछले एक वर्ष से चलाए जा रहे अभियान ‘सेल्फी विथ ट्री’ की टीम में बिहार के अलग-अलग जिलों में दर्जनों ऊर्जावान और उत्साही युवाओं की टीम है, जो चाहे शादी हो, मुंडन हो, या फिर जनेऊ या जन्मदिन हो इस तरह के तमाम मांगलिक अवसरों पर पहुंच जाते हैं और महंगे गिट के बदले फलदार वृक्ष के पौधे भेंट करते हैं। 

सुमन दिल्ली, गोरखपुर और मुंबई में सरकारी नौकरी भी की परंतु उनका उस नौकरी में मन नहीं लगा। उन्होंने आईएएनएस को बताया कि समस्तीपुर की धरती ने ही उन्हें शिक्षा दी, जिस कारण उन्हें नौकरी मिली परंतु उनका भी कर्तव्य अपनी जन्मस्थली के प्रति है, इस कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने गांव लौट आए। 

उन्होंने आईएएनएस को बताया, “मैं पौधरोपण का कार्य पिछले 10 वर्षो से करता आ रहा हूं, लेकिन पिछले चार वर्षो से इसमें तेजी आई है।” 

लोगों के सहयोग से कम से कम 80 हजार पौधा लगाने और बांटने का दावा करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे समाज में बेटियों की शादी के समय फलदान का भी रिवाज है, लेकिन बेटियां उस फलदान में दिए गए फलों को वे खा नहीं पातीं। उनका कहना है कि अगर फलदान की जगह ‘पौधादान’ का रिवाज शुरू कर दिया जाए तो न वर्तमान पीढ़ी, बल्कि बेटियों की आने वाली पीढ़ी भी पौधादान के फलों का स्वाद का आनंद ले सकेंगी।” 

अपने क्षेत्र में ‘ट्री मैन’ से पहचान बना चुके सुमन का कहना है कि उनकी इच्छा पौधरोपण को जनांदोलन बनाने की है। अगर देश के सभी लोग केवल अपने जन्मदिन पर एक-एक पौधा लगाए तो पर्यावरण संरक्षण की समस्या का खुद समाधान हो जाएगा। 

सुमन की युवा टोली क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों, बेटियों व दिव्यांगों को नि:शुल्क शिक्षा देने के लिए शहर के पांचुपुर में बीएसएस क्लब के नाम से एक नि:शुल्क पाठशाला भी खोल रखा है। इस पाठशाला में मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। यहां की पढ़ाई पूरी करने वाले या नौकरी लग जाने पर पाठशाला छोड़कर जाने वाले छात्र-छात्राओं से गुरुदक्षिणा के नाम पर पौधरोपण करवाया जाता है। 

उन्होंने बताया कि बीएसएस क्लब से अब तक लगभग 3000 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, जिनमे से 400 से अधिक बच्चे विभिन्न सरकारी नौकरियों में चयनित हो चुके हैं। 

सुमन को पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने के नेक काम के लिए कई मौकों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पिछले साल पांच अक्टूबर को पटना के चिड़ियाघर में आयोजित कार्यक्रम में सुमन को सम्मानित किया था। इसके अलावे इन्हें लखनउ में पर्यावरण योद्धा सम्मान तथा पटना में पर्यावरण सुरक्षा सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। 

सुमन के इन कार्यो की प्रशंसा स्थानीय लोग भी करते हैं। समस्तीपुर के चिकित्सक एऩ क़े आनंद कहते हैं कि राजेश सुमन से बच्चों और युवाओं को ही नहीं बुजुर्गो को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में अंधाधुंध पेड़ काटे जाते हैं और फिर पर्यावरण बचाने की बात की जाती है, जबकि सुमन पेड़ लगाने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि आज सुमन से सभी को सीख लेने की जरूरत है। 

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